"कार्य ही पूजा है/कर्मण्येव अधिकारस्य मा फलेषु कदाचना" दृष्टान्त का पालन होता नहीं,या होने नहीं दिया जाता जो करते हैं उन्हें प्रोत्साहन की जगह तिरस्कार का दंड भुगतना पड़ता है आजीविका के लिए कुछ लोग व्यवसाय, उद्योग, कृषि से जुडे, कुछ सेवारत हैंरेल, रक्षा सभी का दर्द उपलब्धि, तथा परिस्थितियों सहित कार्यक्षेत्र का दर्पण तिलक..(निस्संकोच ब्लॉग पर टिप्पणी/अनुसरण/निशुल्क सदस्यता व yugdarpan पर इमेल/चैट करें, संपर्कसूत्र-तिलक संपादक युगदर्पण 09911111611, 09999777358

बिकाऊ मीडिया -व हमारा भविष्य

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Thursday, September 25, 2014

'मेक इन इंडिया' योजना

'मेक इन इंडिया' योजना
नई दिल्ली (युदस) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना 'मेक इन इंडिया' अभियान  
का शुभारम्भ कर इस को पंडित दीन दयाल उपाध्याय को समर्पित किया। इस अवसर पर एक वेबपोर्टल 'मेकइनइंडियाडॉटकॉम' भी आरम्भ करते उन्होंने कहा कि यह एक सोच मात्र नहीं है बल्कि इस सोच पर खरा उतरना हम सब का दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया एक शेर द्वारा उठाया गया पग है। इस पोर्टल पर निवेशकों की सहायता के लिए कई प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही यहां उपस्थित सभी प्रतिनिधियों को नवरात्र की भी बधाई दी।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के लिए एफडीआइ का अर्थ 'फ‌र्स्ट डेवलप इंडिया' है। अपने भाषण में उन्होंने जहां भारत की जनशक्ति का उल्लेख किया, वहीं डिजिटल इंडिया, ई-क्षेत्र और इससे जुड़े समस्त क्षेत्रों के साथ 'लिंक वेस्ट' का एक नया नारा भी दिया। मोदी ने कहा कि इस के तहत सरकार देश में निकले कचरे के माध्यम देश का विकास करेगी। इसको पीपीपी प्रारूप के तहत किया जाएगा। उन्होंने उद्योगपतियों को इस परियोजना के लिए आगे आने को कहा। अपने भाषण में उन्होंने मंगलयान की सफलता के लिए भारत के इंजीनियरों की पीठ भी थपथपाई।
modi-tokyoप्रधानमंत्री ने पर्यटन और हॉस्पिटल उद्योग के लिए भी संभावनाएं खोजने के लिए उद्योगपतियों को आगे आने का न्यौता दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास है, कि देश में वर्तमान नियमों को न्यूनतम कर उद्योगों को सशक्त किया जाए। पीएम मोदी ने कहा कि आज विश्व के देशों को यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि उनके लिए बाजार कहां उपलब्ध है। भारत एक ऐसा देश है जहां विश्व के उद्योगपतियों को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है।हमें विदेश पलायन की स्थिति को बदलना है. इस सोच और विचार को पूरे विश्व में फैलाना है।
अपने भाषण के आरम्भ में मोदी ने बैठक में उद्योगपतियों को स्थान नहीं मिलने पर क्षमा मांगी। विज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने विदेश पलायन को रोकने पर बल दिया। साथ ही कहा कि उद्योगपतियों को सरकार पर विश्वास करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश की जनता हाथों की शक्ति को बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।
मोदी ने देश के विकास के लिए राज्यों से केंद्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का भी आहवान किया। उन्होंने कहा कि यदि राज्यों का विकास होगा या वहां उद्योग लगेंगे, तो यह देश का ही विकास है। मोदी ने कहा कि राज्यों के रास्ते ही देश का विकास संभव है। मंच से उन्होंने अपनी सरकार और अपनी प्रशासनिक व्यवस्था की भी प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि उनके साथ काम करने वाले वाले सभी अधिकारी उनसे अधिक सकारात्मक सोच वाले हैं जो एक कदम आगे बढ़कर काम करते हैं। उन्होंने देश और विदेश के उद्योगपतियों से भारत के विकास में सहयोग करने की अपील की। किसी भी उद्योग के लिए सबसे बड़ी बाधा होती है नीति और नियमन के नाम पर अड़ंगेबाजी। सरकार ने इसके लिए 'इन्वेस्ट इंडिया' नाम का प्रकोष्ठ बनाया है, जो इस मामले में विदेशी निवेशकों का मार्गदर्शन करेगा। 
कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस अभियान और केंद्र सरकार के दृष्टिकोण को वहां उपस्थित उद्योगपतियों के समक्ष प्रस्तुत30 देशों की 3000 कंपनियों को भारत में उत्पादन के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया अभियान के तहत लालफीताशाही से छुटकारा पाना सरकार का लक्ष्य है। इस कार्यक्रम में उपस्थित देश के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी और कुमार मंगलम बिड़ला ने केंद्र के इस अभियान की जमकर प्रशंसा की है। इन दोनों उद्योगपतियों का मानना है कि इस अभियान से देश में विकास की गति तीव्र होगी। अंबानी ने कहा कि उनकी कंपनी अगले डेढ़ वर्ष में सवा लाख रोजगार उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि मोदी का प्र मं बनना देश का सौभाग्य है, वो सपने देखते हैं और उसे पूरा करते हैं. और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करते हैं। इस कार्यक्रम में प्राय: तीस देशों के उद्योगपति भाग ले रहे हैं।
मेक इन इंडिया अभियान के तहत केंद्र सरकार ने देश में विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए 25 क्षेत्रों की पहचान की है। सरकार ने ऐसे प्रमुख उद्योग क्षेत्र ऑटोमोबाइल, रसायन, सूचना तकनीक, दवा, कपड़ा, बंदरगाह, उड्डयन, चमड़ा, पर्यटन-हॉस्पिटैलिटी और रेलवे जैसे क्षेत्र चुने हैं, जिनमें भारत भविष्य में विनिर्माण केंद्र के क्षेत्र से विश्व भर में 
अग्रणी देश बन सकता है। 
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